‘गलत फैसला’

30 जनवरी 1948 : 3 गोलियों की कहानी, जो गांधी जी को मारी गई थीं
गांधीजी की पुण्य तिथि पर उनको शत शत नमन करते हुए एक विचारणीय लघुकथा पटल पर प्रेषित है


पप्पू बाहर आंगन में खेल रहा था, तभी उसके कानों में बापू अमर रहे के नारे सुनाई देने लगे। वह दौड़ता हुआ अपनी मां के पास आया और बोला मां आज ये नारे क्यों लगाए जा रहे हैं। मां ने अपने बेटे को बहुत प्यार से समझाते हुए कहा बेटे ये नारे उस महान आत्मा के लिए लगाए जा रहे हैं,जिन्होंने अपनी सूझ बूझ,प्रबल इच्छा शक्ति, त्याग और समर्पण के बल बूते पर भारतीयों को एकजुट करके अंग्रेजों के अत्याचार से मुक्ति दिलाई। नाथूराम गोडसे ने आज ही के दिन गांधीजी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। पप्पू को आश्चर्य हुआ कि इतने महान व्यक्ति को कोई कैसे मार सकता है? उसने अपनी मां से पूछा ऐसा क्यों किया उन्होंने। तब मां ने बताया कि जीवनभर गांधीजी ने अच्छे कार्य किए, परंतु भारत विभाजन के दौरान भारतीय मुसलमानों की राजनैतिक मांगों का समर्थन करके हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। चूंकि गोड़से एक हिन्दूवादी विचारधारा के थे, उनको और उनके जैसे अनेक लोगों को गांधीजी के इस फैसले पर नाराजगी थी। अतः गुस्से में आकर गोड़से ने उन्हें गोलियों से भून दिया। पप्पू सारी बातें ध्यान से सुन रहा था और उसकी आंखों से अविरल अश्रुधारा बह रही थी। तब उसकी मां ने उसे समझाया कि जीवन का एक गलत फैसला हमारा जीवन बर्बाद कर देता है, अतः प्रत्येक कार्य को सोच समझ कर करना चाहिए।
डॉ. रेखा मंडलोई “गंगा” इन्दौर

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