‘जोकर का दर्द’

दुनिया में सबसे मुश्किल काम है, अपने आप को आकार दे पाना।चित्रकार खुद को ही तराशने में, तल्लीन निहारता है बस आयना।अपने दर्द की लकीरों को यूं देख,मुश्किल है वैसा ही उकेर पाना। पर जोकर का जीवन तो है बस,लोगों के लिए खुशियां तलाशना।जानता है कि मुझे लोगों के चेहरे, पर हंसी लाने की करनीContinue reading “‘जोकर का दर्द’”

बचपन की याद ‘

नीम बरगद हो या पीपल,देते शीतल ठंडी छाव सदा।गांव का शांत वातावरण ही,हमको लगता हरदम प्यारा।चिंता फिकर नहीं है हमको,मिल जुल बरसाते प्यार सदा।बचपन की ये प्यारी दोस्ती,बनी रहे आबाद है भाव यही।सुबह सवेरे ठंडी छाया में आ,मिलता गजब का सकुन हमें,अल्हड़ बचपन की ये तस्वीर,लौटा लाती बचपन की ओर हमें।खेल कूद का प्यारा बचपनContinue reading “बचपन की याद ‘”

‘विश्व योग दिवस ‘

योग से होता चित्त की वृतियों का शमन इसलिए करना है हमें योग,मन से शरीर का मिलन भाव प्रदान कर मजबूती देता है हमें योग।आत्मा को परमात्मा से जोड़ एकाकार का भाव जगाने का नाम है योग,सर्वोत्तम समय है ब्रह्ममुहूर्त तभी करो सब मिल व्यायाम और योग।शान्त, सौम्य वातावरण और मन में हो उल्लास तभीContinue reading “‘विश्व योग दिवस ‘”

विश्व पर्यावरण दिवस

नीम, आंवला, बरगद, पीपल जैसे पेड़ों से धरा सजाए,ठंडी छाया और जीवन रक्षक प्राण वायु का लाभ उठाए।रोग नाशक अनमोल औषधियों का भरपूर खजाना पाए,अपने साथ साथ दूसरों के लिए भी जीवन आधार पाए।रणनीति ऐसी बनाए कि हरे भरे वृक्षों को कोई काट न पाए,प्लास्टिक के प्रयोग को प्रतिबंधित कर दुनिया को बचाए।दुष्परिणाम ध्वनि विस्तारकContinue reading “विश्व पर्यावरण दिवस”

लघुकथा

एक समाधान ऐसा भी सुधा आज कुछ चहकते हुए रवि को अपने मन में उठने वाले विचारों से अवगत कराने को व्याकुल हो रही थी। रवि उस समय अपने विचारों में इस तरह डूबा हुआ था कि उसे यह आभास ही नहीं हुआ कि सुधा उसके पास आकार कुछ कह रही है। रवि विचारों केContinue reading “लघुकथा”

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता

आजादी के साल बीत गए देखो लगभग सत्तर – पचहत्तर।स्वतंत्र हुए हम लोग छोड़ गुलामी की जो ओढ़े थे चादर।माता- पिता बनाते हैं जैसे बच्चों को अपने आप पर निर्भर।वैसे ही आजाद भारत के बाशिंदों तुम भी बनो आत्मनिर्भर। शिक्षा की ले बुनियाद हो खड़े हम अपने पैरों पर। और ना रहे अब हम निर्भरContinue reading “शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता”

बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना

अद्वितीय,यादगार दिन जब ईद का आया,सम्पूर्ण संसार में खुशियों का था आलम छाया।प्रभु का वरदान बन इस दिन बेटा जग में आया,खुशी से झूम झूम कर सबने बधाई गीत गाया। तुम्हारी मां का मन असीम खुशियों से भर आया,तुम्हारे पिता ने भी प्रभु के सम्मुख मस्तक झुकाया।सूरज की किरणों ने आकर संदेश यह सुनाया,आज फिरContinue reading “बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना”

जिंदगी

ए जिन्दगी तू जरा हंसकर जीना सीखा दे,हसरते भर जाए असीम ऐसा कोई पाठ पढ़ा दे।कमियों का पुतला जान इंसान को सही राह दिखा दे,इंसा का इंसा से रहे प्यार का रिश्ता ये भाव जगा दे।ए जिन्दगी…………। बैर भाव ना हो किसी से ऐसी बेमिसाल जगह बता दे,प्यार की असीम बरसात से जीवन की बागियाContinue reading “जिंदगी”

परशुरामजी की लीला

आतंक और अत्याचार से भरने लगा था जब संसार,त्रेता युग में जन्में प्रभु परशुराम ले करके छठा अवतार।शस्त्र – शास्त्र का ले ज्ञान शिव से पाई शक्ति अपार,परम पराक्रमी वीर साहसी थे अदभुत शक्तियों का भण्डार। जमदग्नि-रेणुका के घर जन्में छाई खुशियां भृगुवंश में अपार,परशुराम के दर्शन पाकर धन्य हुआ सम्पूर्ण संसार।भीष्म, कर्ण और द्रोणContinue reading “परशुरामजी की लीला”

आज का दौर

आज है कठिनाई का ऐसा दौर, लगता है ऐसे में कोई जी नहीं पाएगा।हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा,सोचा न था ऐसा दौर भी कभी आएगा। अंग्रेजों की दासता सा माहौल घिर आएगा,कोरोना की मजबूत बेड़ियों में तू बंध जाएगा।हिम्मत मत हार ए नादान मुसाफिर,ये वक्त ज्यादा समय तक नहीं ठहर पाएगा। दृढ़Continue reading “आज का दौर”