देवरानी जेठानी

देवरानी जेठानी की यह जोड़ी है अनमोल,हर जंग को जीतने का हौंसला इनका है बेजोड़।नव वधुओं सा कर श्रृंगार हर्षित है इनका मन आज,बजने वाले हैं इनके घर में ढोल, नगाड़े साज। हर पल साथ निभाए और प्रसन्न रखे परिवार,हर मुश्किल को हंस कर जी ले बड़े खुशियां अपार।सज संवर कर निकल पड़ी ले उत्साहContinue reading “देवरानी जेठानी”

मेरा मन

कभी बच्चा बन शरारत को मचलता है मेरा मन,कभी जिम्मेदारियों के बोझ से बोझिल हो जाता है ये मन।प्रति पल परिवर्तित भाव को काव्य रूप देता है मेरा मन,सृजन क्षमता को विस्तार देने को आतुर रहता है मेरा मन। समाज में व्याप्त सुंदरता को महसूस करता है मेरा मन, सुरम्य प्रकृति में विचरण कर प्रसन्नContinue reading “मेरा मन”

देशप्रेम

रीना अपने परिवार की बहुत लाडली बेटी थी। घर में दिन भर चहकती रहती थी। बड़ी हो जाने के कारण उसके पिता ने सोचा कि अब मुझे अपनी बेटी की शादी कर देना चाहिए। उसने अपने परिवार में इस बात की चर्चा की। वह चाहते थे कि उनकी बिटिया की शादी उनके दोस्त के बेटेContinue reading “देशप्रेम”

‘जोकर का दर्द’

दुनिया में सबसे मुश्किल काम है, अपने आप को आकार दे पाना।चित्रकार खुद को ही तराशने में, तल्लीन निहारता है बस आयना।अपने दर्द की लकीरों को यूं देख,मुश्किल है वैसा ही उकेर पाना। पर जोकर का जीवन तो है बस,लोगों के लिए खुशियां तलाशना।जानता है कि मुझे लोगों के चेहरे, पर हंसी लाने की करनीContinue reading “‘जोकर का दर्द’”

बचपन की याद ‘

नीम बरगद हो या पीपल,देते शीतल ठंडी छाव सदा।गांव का शांत वातावरण ही,हमको लगता हरदम प्यारा।चिंता फिकर नहीं है हमको,मिल जुल बरसाते प्यार सदा।बचपन की ये प्यारी दोस्ती,बनी रहे आबाद है भाव यही।सुबह सवेरे ठंडी छाया में आ,मिलता गजब का सकुन हमें,अल्हड़ बचपन की ये तस्वीर,लौटा लाती बचपन की ओर हमें।खेल कूद का प्यारा बचपनContinue reading “बचपन की याद ‘”

‘विश्व योग दिवस ‘

योग से होता चित्त की वृतियों का शमन इसलिए करना है हमें योग,मन से शरीर का मिलन भाव प्रदान कर मजबूती देता है हमें योग।आत्मा को परमात्मा से जोड़ एकाकार का भाव जगाने का नाम है योग,सर्वोत्तम समय है ब्रह्ममुहूर्त तभी करो सब मिल व्यायाम और योग।शान्त, सौम्य वातावरण और मन में हो उल्लास तभीContinue reading “‘विश्व योग दिवस ‘”

विश्व पर्यावरण दिवस

नीम, आंवला, बरगद, पीपल जैसे पेड़ों से धरा सजाए,ठंडी छाया और जीवन रक्षक प्राण वायु का लाभ उठाए।रोग नाशक अनमोल औषधियों का भरपूर खजाना पाए,अपने साथ साथ दूसरों के लिए भी जीवन आधार पाए।रणनीति ऐसी बनाए कि हरे भरे वृक्षों को कोई काट न पाए,प्लास्टिक के प्रयोग को प्रतिबंधित कर दुनिया को बचाए।दुष्परिणाम ध्वनि विस्तारकContinue reading “विश्व पर्यावरण दिवस”

लघुकथा

एक समाधान ऐसा भी सुधा आज कुछ चहकते हुए रवि को अपने मन में उठने वाले विचारों से अवगत कराने को व्याकुल हो रही थी। रवि उस समय अपने विचारों में इस तरह डूबा हुआ था कि उसे यह आभास ही नहीं हुआ कि सुधा उसके पास आकार कुछ कह रही है। रवि विचारों केContinue reading “लघुकथा”

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता

आजादी के साल बीत गए देखो लगभग सत्तर – पचहत्तर।स्वतंत्र हुए हम लोग छोड़ गुलामी की जो ओढ़े थे चादर।माता- पिता बनाते हैं जैसे बच्चों को अपने आप पर निर्भर।वैसे ही आजाद भारत के बाशिंदों तुम भी बनो आत्मनिर्भर। शिक्षा की ले बुनियाद हो खड़े हम अपने पैरों पर। और ना रहे अब हम निर्भरContinue reading “शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता”

बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना

अद्वितीय,यादगार दिन जब ईद का आया,सम्पूर्ण संसार में खुशियों का था आलम छाया।प्रभु का वरदान बन इस दिन बेटा जग में आया,खुशी से झूम झूम कर सबने बधाई गीत गाया। तुम्हारी मां का मन असीम खुशियों से भर आया,तुम्हारे पिता ने भी प्रभु के सम्मुख मस्तक झुकाया।सूरज की किरणों ने आकर संदेश यह सुनाया,आज फिरContinue reading “बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना”