परशुरामजी की लीला

आतंक और अत्याचार से भरने लगा था जब संसार,त्रेता युग में जन्में प्रभु परशुराम ले करके छठा अवतार।शस्त्र – शास्त्र का ले ज्ञान शिव से पाई शक्ति अपार,परम पराक्रमी वीर साहसी थे अदभुत शक्तियों का भण्डार। जमदग्नि-रेणुका के घर जन्में छाई खुशियां भृगुवंश में अपार,परशुराम के दर्शन पाकर धन्य हुआ सम्पूर्ण संसार।भीष्म, कर्ण और द्रोणContinue reading “परशुरामजी की लीला”

आज का दौर

आज है कठिनाई का ऐसा दौर, लगता है ऐसे में कोई जी नहीं पाएगा।हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा,सोचा न था ऐसा दौर भी कभी आएगा। अंग्रेजों की दासता सा माहौल घिर आएगा,कोरोना की मजबूत बेड़ियों में तू बंध जाएगा।हिम्मत मत हार ए नादान मुसाफिर,ये वक्त ज्यादा समय तक नहीं ठहर पाएगा। दृढ़Continue reading “आज का दौर”

विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ पृथ्वी बचाओ आंदोलन का प्रारम्भ होना चाहिए। मां वसुंधरा कितनी कष्ट में है , उनके मन के भाव उजागर करती मेरी स्वरचित कविता प्रेषित कर रही हूँ – “व्यथा धरती मां की”

क्या क्या कष्ट हैं झेले मैंने , उफ तक ना कर पाई,ऐ मानव तेरी जिद को अब तक मैं सहन करती आई।घन धान्य से परिपूर्ण जीवन मैं सबको देती आई,अपनी छाती पर हल के कठोर प्रहार को सहती आई। अन्न,धन से परिपूर्ण कर जीवन खुशियां बरसाने आई,सब उल्लसित रहे यह सोच कर पीड़ा सहती आई।उदासीContinue reading “विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ पृथ्वी बचाओ आंदोलन का प्रारम्भ होना चाहिए। मां वसुंधरा कितनी कष्ट में है , उनके मन के भाव उजागर करती मेरी स्वरचित कविता प्रेषित कर रही हूँ – “व्यथा धरती मां की””

वैश्विक महामारी

उद्वेलित मन लिए खड़े सब भर अश्रु की अविरल धार,वैश्विक महामारी के ताण्डव ने मचा दिया था हा हा कार।देख प्रलयंकारी विस्फोट को आया सबको यही विचार,एक सदी के अंतराल से कुदरत कर दिया पुनः प्रहार। करुण क्रंदन और आर्तनाद संग मानव था बेबस लाचार,शिथिल मन से सोच में बैठे कैसे बचाए अपना परिवार।बच्चों केContinue reading “वैश्विक महामारी”

मां

मातृ दिवस पर मां के चरणों में शत शत नमन के साथ स्वरचित कविता प्रेषित है दिल की धड़कन में सदा धड़कती है मां,देवताओं के आशीर्वाद सा वरदान है मां।मेरे होंठो की मधुर मुस्कान का नाम है मां,मेरा सुख चैन भरा असीम संसार है मां। धरा पर ममता की मूरत का नाम है मां,शब्दातीत हैContinue reading “मां”

मैं महत्त्वपूर्ण हूँ

कहने को मैं मजदूर दीन हीन सा जीवन जी रहा हूँ,पर दुनिया की सारी जिम्मेदारियां खुद निभा रहा हूँ।मैं विधाता से प्राप्त वरदान से अन्नदाता बन गया हूँ,फिर भी दो वक्त की रोटी के लिए मैं संघर्ष कर रहा हूँ। पर्वतों का सीना चीरने के लिए हथौड़ा चला रहा हूँ,लोगों के रास्ते सुगम बनाने काContinue reading “मैं महत्त्वपूर्ण हूँ”

समाज सुधारक

सारी दुनिया की गंदगी उठा कर बाहर फेंकना है,समाज सुधारक बन मुझे अपनी रोटियां सेंकना है ।इस दुनिया की अच्छाइयों की ओर हमें देखना है,जन्नत सी खुशियां है द्वार खड़ी उसे समेटना है।सामाजिक न्याय की भावना लोगों में सहेजना है,छुआछूत, जाति-पाति का भेद दूर ढकेलना है।समाज सुधारक का काम ही मुश्किलों को झेलना है,फिर भीContinue reading “समाज सुधारक”

लिखूं तो क्या लिखूं?

बरसों से मन में दबी हुई थी इच्छाएं,रचनाकार बन साहित्य जगत में नाम कमाऊं।जगत में कई उपादान है लिखने के लिए,सूर्य, चंद्र, तारे, नदी, फूल सब पर कुछ लिखूंसोचना था बड़ा आसान लिखना उतना ही कठिन था,लिखने जब बैठी तो मन में विचार आया क्या लिखूं।विचारों का तूफान पकड़ने लगा बहुत तेजी,सोचा बचपन को सबसेContinue reading “लिखूं तो क्या लिखूं?”

भारतीय नारी

‘ नारी शक्ति को दो सदा सम्मान, बढ़ाओ निरन्तर उसका मान।’अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। के साथ महिलाओं के सम्मान में एक स्वरचित कविता पटल पर प्रेषित है। चाहे आंधी आए या तूफान,नहीं कभी किसी से हारी हूं।नाज है मुझे अपने आप पर,कि मैं एक भारतीय नारी हूं। बंधन,आदेश, बंदिशों को सह,फिरContinue reading “भारतीय नारी”