संदेश दशहरे पर्व का

दशहरा पर्व संदेश यह लाया करो सत्य से प्रित तो होगी आपकी जीत,केवल भलाई की चाहते हो जीत तो बुराई से बिलकुल ना करो तुम प्रीत।छल, कपट, अभिमान ने रावण को दिलाई करारी हार न पाया वह जीत।शिवजी के परम भक्त ने कर दी थी नादानी, लगा ली माँ सीता से प्रीत। छल-कपट से उसनेContinue reading “संदेश दशहरे पर्व का”

गुरुगान

गुरुपूर्णिमा की हार्दिक बधाई के साथ समस्त गुरु वृंद के चरणों में शत शत नमन🙏🙏गुरुगानगुरू देता सत्य का ज्ञान जिससे संकट दूर हो जाता है सारा।सूर्य सा तेजस्वी स्वरुप ले गुरु ने सबका जीवन संवारा।अज्ञानता के घोर तम से गुरू की अलौकिक शक्ति ने उबारा।आशीर्वाद हो गुरु का तो हर मुश्किल से मिल जाता हैContinue reading “गुरुगान”

बाल निर्माण

भावी भविष्य के कर्णधारों का करना है अगर बेहतर निर्माण।प्रेम,सेवा,दया, त्याग आदि मूल्यों का करना होगा संचरण।परदुख कतराता, और ईमानदारी जैसे बीजों का होने दो अंकुरण।सुख -दुख के भाव समझे और सहभागिता से भर जाए उनके मन। बाल मन में क्रियात्मकता के भाव का भी होने दो प्रस्फुटन।व्यवहारिक पक्ष की प्राथमिकता के अनुकूल ही सीखनाContinue reading “बाल निर्माण”

ललित विस्तर में व्याप्त 64 प्राचीन लिपियाँ

आइए आज हम प्राप्त करे प्राचीन लिपियों का ज्ञान।प्राचीन काल में अनेक लिपियाँ बढ़ाती थी भारत की शान।प्राचीन बौद्ध ग्रंथ ललित- विस्तर में 64 लिपियाँ थी विद्यमान।इन विशिष्ट लिपियों ने ही दिलाई भारत को नई पहचान। ब्राह्मी, खरोष्ठी, पुष्कर, सारी, अंग लिपि थी बड़ी महान।बंग, मगध, मांगल्य, मनुष्य लिपि की थी अपनी शान।अंगुलीय, अनुलोम, शकारीContinue reading “ललित विस्तर में व्याप्त 64 प्राचीन लिपियाँ”

भारतीय नारी

‘ नारी शक्ति को दो सदा सम्मान,बढ़ाओ निरन्तर उसका मान।’अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। के साथ महिलाओं के सम्मान में एक स्वरचित कविता प्रेषित है।‘ भारतीय नारी’चाहे आंधी आए या तूफान,नहीं कभी किसी से हारी हूं।नाज है मुझे अपने आप पर,कि मैं एक भारतीय नारी हूं।बंधन,आदेश, बंदिशों को सह,फिर भी पूरी तरहContinue reading “भारतीय नारी”

‘ऋतुराज वसंत’

खुशियां साथ ले ऋतुराज वसंतआया,पतझड़ की वेदना को जैसे भूल आया।सरसों, राई संग टेसू की बहार लाया,धरा पर नवयौवन – सा खुमार छाया। आम्र मौर पर कोयल ने शोर मचाया,खेत- खलियान को मुस्कान दे आया।कृषकों के जीवन में खुशहाली लाया,बसंती बयार ले ऋतुराज वसंत आया। अंग- अंग में उमंग की हिलोर लाया,गुलशन का कोना- कोनाContinue reading “‘ऋतुराज वसंत’”

“शास्त्री जयन्ती”

सादा जीवन उच्च विचार वाले शास्त्रीजी को था सादगी से प्यार,दूसरे प्रधानमंत्री बन भारत को जिसने सिखलाया सदाचार।गांधीवादी विचारधारा संग जो सदा अपनाते रहे शिष्टाचार,निष्ठावान व्यक्तित्व और सच्चाई का करते थे सबसे व्यवहार। किसानों के बन अन्नदाता किया उन सबका सदा उद्धार,उनके जय जवान, जय किसान के नारे से था भारतीयों को प्यार।कश्मीर घाटी कोContinue reading ““शास्त्री जयन्ती””

‘हिन्दी दिवस’

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई के साथ एक स्वरचित कविता प्रेषित है:- हिन्दी बन जन मानस की अति प्रिय भाषा।तार दिलों के जोड़ने की जगाती आशा।सभ्यता- संस्कृति की जो बताती परिभाषा।निराली लिपि भी इसकी बनाती सरल भाषा। जैसे बोले वैसे ही लिखती जाए यह भाषा।प्राचीन भाषा पाली का विकसित रूप ये भाषा।महाकवि केशव,भूषण,Continue reading “‘हिन्दी दिवस’”

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता

आजादी के साल बीत गए देखो लगभग सत्तर – पचहत्तर।स्वतंत्र हुए हम लोग छोड़ गुलामी की जो ओढ़े थे चादर।माता- पिता बनाते हैं जैसे बच्चों को अपने आप पर निर्भर।वैसे ही आजाद भारत के बाशिंदों तुम भी बनो आत्मनिर्भर। शिक्षा की ले बुनियाद हो खड़े हम अपने पैरों पर। और ना रहे अब हम निर्भरContinue reading “शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता”