भारतीय नारी

‘ नारी शक्ति को दो सदा सम्मान,बढ़ाओ निरन्तर उसका मान।’अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। के साथ महिलाओं के सम्मान में एक स्वरचित कविता प्रेषित है।‘ भारतीय नारी’चाहे आंधी आए या तूफान,नहीं कभी किसी से हारी हूं।नाज है मुझे अपने आप पर,कि मैं एक भारतीय नारी हूं।बंधन,आदेश, बंदिशों को सह,फिर भी पूरी तरहContinue reading “भारतीय नारी”

‘ऋतुराज वसंत’

खुशियां साथ ले ऋतुराज वसंतआया,पतझड़ की वेदना को जैसे भूल आया।सरसों, राई संग टेसू की बहार लाया,धरा पर नवयौवन – सा खुमार छाया। आम्र मौर पर कोयल ने शोर मचाया,खेत- खलियान को मुस्कान दे आया।कृषकों के जीवन में खुशहाली लाया,बसंती बयार ले ऋतुराज वसंत आया। अंग- अंग में उमंग की हिलोर लाया,गुलशन का कोना- कोनाContinue reading “‘ऋतुराज वसंत’”

“शास्त्री जयन्ती”

सादा जीवन उच्च विचार वाले शास्त्रीजी को था सादगी से प्यार,दूसरे प्रधानमंत्री बन भारत को जिसने सिखलाया सदाचार।गांधीवादी विचारधारा संग जो सदा अपनाते रहे शिष्टाचार,निष्ठावान व्यक्तित्व और सच्चाई का करते थे सबसे व्यवहार। किसानों के बन अन्नदाता किया उन सबका सदा उद्धार,उनके जय जवान, जय किसान के नारे से था भारतीयों को प्यार।कश्मीर घाटी कोContinue reading ““शास्त्री जयन्ती””

‘हिन्दी दिवस’

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई के साथ एक स्वरचित कविता प्रेषित है:- हिन्दी बन जन मानस की अति प्रिय भाषा।तार दिलों के जोड़ने की जगाती आशा।सभ्यता- संस्कृति की जो बताती परिभाषा।निराली लिपि भी इसकी बनाती सरल भाषा। जैसे बोले वैसे ही लिखती जाए यह भाषा।प्राचीन भाषा पाली का विकसित रूप ये भाषा।महाकवि केशव,भूषण,Continue reading “‘हिन्दी दिवस’”

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता

आजादी के साल बीत गए देखो लगभग सत्तर – पचहत्तर।स्वतंत्र हुए हम लोग छोड़ गुलामी की जो ओढ़े थे चादर।माता- पिता बनाते हैं जैसे बच्चों को अपने आप पर निर्भर।वैसे ही आजाद भारत के बाशिंदों तुम भी बनो आत्मनिर्भर। शिक्षा की ले बुनियाद हो खड़े हम अपने पैरों पर। और ना रहे अब हम निर्भरContinue reading “शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता”

बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना

अद्वितीय,यादगार दिन जब ईद का आया,सम्पूर्ण संसार में खुशियों का था आलम छाया।प्रभु का वरदान बन इस दिन बेटा जग में आया,खुशी से झूम झूम कर सबने बधाई गीत गाया। तुम्हारी मां का मन असीम खुशियों से भर आया,तुम्हारे पिता ने भी प्रभु के सम्मुख मस्तक झुकाया।सूरज की किरणों ने आकर संदेश यह सुनाया,आज फिरContinue reading “बेटे के जन्मदिवस पर स्वरचित शुभकामना”

जिंदगी

ए जिन्दगी तू जरा हंसकर जीना सीखा दे,हसरते भर जाए असीम ऐसा कोई पाठ पढ़ा दे।कमियों का पुतला जान इंसान को सही राह दिखा दे,इंसा का इंसा से रहे प्यार का रिश्ता ये भाव जगा दे।ए जिन्दगी…………। बैर भाव ना हो किसी से ऐसी बेमिसाल जगह बता दे,प्यार की असीम बरसात से जीवन की बागियाContinue reading “जिंदगी”

परशुरामजी की लीला

आतंक और अत्याचार से भरने लगा था जब संसार,त्रेता युग में जन्में प्रभु परशुराम ले करके छठा अवतार।शस्त्र – शास्त्र का ले ज्ञान शिव से पाई शक्ति अपार,परम पराक्रमी वीर साहसी थे अदभुत शक्तियों का भण्डार। जमदग्नि-रेणुका के घर जन्में छाई खुशियां भृगुवंश में अपार,परशुराम के दर्शन पाकर धन्य हुआ सम्पूर्ण संसार।भीष्म, कर्ण और द्रोणContinue reading “परशुरामजी की लीला”

आज का दौर

आज है कठिनाई का ऐसा दौर, लगता है ऐसे में कोई जी नहीं पाएगा।हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा,सोचा न था ऐसा दौर भी कभी आएगा। अंग्रेजों की दासता सा माहौल घिर आएगा,कोरोना की मजबूत बेड़ियों में तू बंध जाएगा।हिम्मत मत हार ए नादान मुसाफिर,ये वक्त ज्यादा समय तक नहीं ठहर पाएगा। दृढ़Continue reading “आज का दौर”

विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ पृथ्वी बचाओ आंदोलन का प्रारम्भ होना चाहिए। मां वसुंधरा कितनी कष्ट में है , उनके मन के भाव उजागर करती मेरी स्वरचित कविता प्रेषित कर रही हूँ – “व्यथा धरती मां की”

क्या क्या कष्ट हैं झेले मैंने , उफ तक ना कर पाई,ऐ मानव तेरी जिद को अब तक मैं सहन करती आई।घन धान्य से परिपूर्ण जीवन मैं सबको देती आई,अपनी छाती पर हल के कठोर प्रहार को सहती आई। अन्न,धन से परिपूर्ण कर जीवन खुशियां बरसाने आई,सब उल्लसित रहे यह सोच कर पीड़ा सहती आई।उदासीContinue reading “विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ पृथ्वी बचाओ आंदोलन का प्रारम्भ होना चाहिए। मां वसुंधरा कितनी कष्ट में है , उनके मन के भाव उजागर करती मेरी स्वरचित कविता प्रेषित कर रही हूँ – “व्यथा धरती मां की””