वैश्विक महामारी

उद्वेलित मन लिए खड़े सब भर अश्रु की अविरल धार,वैश्विक महामारी के ताण्डव ने मचा दिया था हा हा कार।देख प्रलयंकारी विस्फोट को आया सबको यही विचार,एक सदी के अंतराल से कुदरत कर दिया पुनः प्रहार। करुण क्रंदन और आर्तनाद संग मानव था बेबस लाचार,शिथिल मन से सोच में बैठे कैसे बचाए अपना परिवार।बच्चों केContinue reading “वैश्विक महामारी”